लक्सर। उत्तराखंड की राजनीति में किसानों के मुद्दे को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। पूर्व राज्य मंत्री रविंद्र सिंह आनंद ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और राज्य सरकार पर किसानों से किए गए वादे पूरे न करने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है।
रविंद्र सिंह आनंद ने कहा कि आपदा के दौरान लक्सर में स्वयं मुख्यमंत्री ने किसानों के तीन माह के बिजली बिल माफ करने की घोषणा की थी। उस समय किसानों को उम्मीद जगी थी कि सरकार उनकी समस्याओं को समझ रही है, लेकिन आज तक न तो बिजली बिल माफ किए गए और न ही बढ़ते सरचार्ज से कोई राहत दी गई।
उन्होंने कहा कि लक्सर, हरिद्वार और पूरे प्रदेश का किसान पहले से ही प्राकृतिक आपदाओं, अनियमित मौसम, बढ़ती खेती लागत और आर्थिक संकट से जूझ रहा है। ऐसे में लगातार बढ़ते बिजली बिल किसानों की मुश्किलें और बढ़ा रहे हैं।
पूर्व राज्य मंत्री ने सरकार पर चुनावी वादे भूल जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव के समय किसानों को बड़े-बड़े सपने दिखाए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
रविंद्र सिंह आनंद ने मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार किसानों के तीन माह के बिजली बिल माफी के वादे को पूरा नहीं कर सकती, तो उसे किसानों और ग्रामीणों से वोट मांगने का नैतिक अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा, “धामी जी किसानों से वोट मत मांगना, धामी जी ग्रामीणों से वोट मत मांगना। जब किसानों को राहत नहीं मिली तो आखिर किस मुंह से आप गांवों में वोट मांगने जाएंगे?”
रविंद्र सिंह आनंद ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां किसानों को निजी नलकूपों पर बिजली शुल्क में राहत दी जा रही है, जबकि ऊर्जा प्रदेश कहलाने वाले उत्तराखंड में बिजली लगातार महंगी होती जा रही है।
उन्होंने सरकार से किसानों के तीन माह के बिजली बिल माफ करने, सरचार्ज समाप्त करने और कृषि विद्युत दरों में विशेष राहत देने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों से किया गया वादा पूरा नहीं किया तो किसान, मजदूर और ग्रामीण जनता लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगी।
फिलहाल किसानों के बिजली बिल और राहत के मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। अब देखना होगा कि सरकार इस मामले पर क्या रुख अपनाती है।
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