लक्सर। राज्य मंत्री रविंद्र सिंह आनंद ने नगर के एक होटल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जिसमें उन्होंने किसानों एवं ग्रामीणों के बकाया बिजली के बिलों को माफ किए जाने को लेकर सरकार से गुहार लगाई।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष अतिवृष्टि एवं बाढ़ जैसी स्थिति में किसानों का बहुत नुकसान हुआ है और प्रदेश सरकार ने उनकी कोई सुध नहीं ली है उन्होंने प्रदेश सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि किसानों और ग्रामीणों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सरकार से आपदा प्रभावित किसानों एवं ग्रामीण उपभोक्ताओं के बिजली बिल तत्काल माफ करने की कड़ी मांग की।
रविंद्र सिंह आनंद ने कहा कि इस वर्ष पूरे उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं ने भारी तबाही मचाई है। किसानों की फसलें नष्ट हो गईं, पशुधन प्रभावित हुआ और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो चुकी है। ऐसी परिस्थिति में गरीब जनता से बिजली बिल वसूली करना अमानवीय और जनविरोधी रवैया है।
उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा:
“उत्तराखंड एक ऊर्जा प्रदेश है, जहां देश के लिए भारी मात्रा में बिजली का उत्पादन होता है। जब प्रदेश बिजली पैदा कर सकता है, तो अपने ही किसानों और ग्रामीणों को राहत देना सरकार के लिए कोई मुश्किल काम नहीं होना चाहिए। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार जनता पर बोझ डालने में जुटी है।”
आपदा प्रभावित क्षेत्रों के किसानों और ग्रामीणों के बिजली बिलों में विशेष छूट दी जाए। साथ ही गंगा नदी से लगे गांव जिसमें लक्सर और खानपुर के सभी क्षेत्र अत्यधिक जलविष्टि एवं बाढ़ के कारण बरसात के दिनों में एवं फसल तैयार होने पर डूबे रहे उन सभी किसानों एवं ग्रामीणों के बिल माफ होने चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार बड़े उद्योगपतियों को राहत देती है, लेकिन अन्नदाता और गांव के गरीब परिवारों की कोई सुध नहीं लेती। यह साफ दर्शाता है कि वर्तमान सरकार की नीतियां जनता विरोधी हैं।
रविंद्र सिंह आनंद ने सरकार से मांग की:
आपदा प्रभावित सभी किसानों और ग्रामीणों के बिजली बिल तत्काल प्रभाव से माफ किए जाएं।
पुराने बकाया बिलों पर पूर्ण छूट दी जाए।
भविष्य में आपदा की स्थिति में स्वतः राहत व्यवस्था लागू की जाए।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो जनता के साथ मिलकर सड़क से सदन तक संघर्ष किया जाएगा।
